नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने 4 साल के कार्यकाल में सरकारी कर्मचारियों को 5 अलग-अलग तोहफे दिए हैं लेकिन सबसे बड़े ऑफर का गुब्बारा इस चुनावी वर्ष (2019 के लोकसभा चुनाव से पहले) में फूटेगा. केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी नीत गठबंधन सरकार इस बार 15 अगस्त 2018 को दो बड़े ऐलान कर सकती है. लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7वें वेतन आयोग से बड़े वेतन आयोग की सिफारिशें कर सकते हैं. यह भी उम्मीद है कि वह रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर 62 कर दें. इसका फायदा करीब 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों को होगा. राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस ट्रंप कार्ड को मोदी सरकार ने अब तक बचा कर रखा है. इस घोषणा का असर सीधे तौर पर 2019 के आम चुनाव पर पड़ेगा, जिसे जीतने के लिए बीजेपी पुरजोर कोशिश कर रही है.
जनवरी 2016 में बढ़ा था 14 फीसदी वेतन
जनवरी 2016 में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी. हालांकि कर्मचारी इस बढ़ोतरी से खुश नहीं थे. क्योंकि कॉस्ट ऑफ लिविंग और बढ़ती महंगाई में यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान थी. सरकारी कर्मचारियों ने सरकार से मांग की थी कि न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया जाए. यह बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से इतर की जानी चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार ने यह मांग नकार दी. हालांकि मोदी सरकार ने कर्मचारियों के हितों में ढेरों कदम उठाए हैं. ग्रामीण अंचल में तैनात पोस्टल कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने से लेकर डेपुटेशन पर जाने वाले कर्मचारियों के भत्ते में बढ़ोतरी तक शामिल है. यह सब 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर हुआ था. लेकिन इन हितकारी उपायों से सरकारी कर्मचारी संतुष्ट नहीं है.
50 लाख कर्मचारी इंतजार में
बिजनेस टुडे की खबर के मुताबिक सरकार ने अब तक 50 लाख कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ाया है लेकिन ग्रामीण अंचल में तैनात कर्मचारियों की सैलरी में 56 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. जून की शुरुआत में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार ने गांवों में तैनात पार्ट-टाइम पोस्टल सर्विस स्टाफ का वेतन 56 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था. उन्हें 1 जनवरी, 2016 से एरियर मिलेगा.
Source:-ZEENEWS
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जनवरी 2016 में बढ़ा था 14 फीसदी वेतन
जनवरी 2016 में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी. हालांकि कर्मचारी इस बढ़ोतरी से खुश नहीं थे. क्योंकि कॉस्ट ऑफ लिविंग और बढ़ती महंगाई में यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान थी. सरकारी कर्मचारियों ने सरकार से मांग की थी कि न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया जाए. यह बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से इतर की जानी चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार ने यह मांग नकार दी. हालांकि मोदी सरकार ने कर्मचारियों के हितों में ढेरों कदम उठाए हैं. ग्रामीण अंचल में तैनात पोस्टल कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने से लेकर डेपुटेशन पर जाने वाले कर्मचारियों के भत्ते में बढ़ोतरी तक शामिल है. यह सब 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर हुआ था. लेकिन इन हितकारी उपायों से सरकारी कर्मचारी संतुष्ट नहीं है.
50 लाख कर्मचारी इंतजार में
बिजनेस टुडे की खबर के मुताबिक सरकार ने अब तक 50 लाख कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ाया है लेकिन ग्रामीण अंचल में तैनात कर्मचारियों की सैलरी में 56 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. जून की शुरुआत में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार ने गांवों में तैनात पार्ट-टाइम पोस्टल सर्विस स्टाफ का वेतन 56 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था. उन्हें 1 जनवरी, 2016 से एरियर मिलेगा.
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