श्रीनगर : जम्मू कश्मीर में बुधवार (20 जून) को राज्यपाल शासन लग गया है. मंगलवार को बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद देर शाम सीएम महबूबा मुफ्ती ने इस्तीफा दे दिया. यह आठवीं बार है जब जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया गया है. घाटी में यह पहला ऐसा मौका है जब एनएन वोहरा के कार्यकाल में चौथी बार राज्यपाल शासन लगाया जाएगा. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा.
-25 जून 2008 को एनएन वोहरा पहली बार जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बनें थे. वोहरा के कार्यकाल में पहली बार और जम्मू कश्मीर में पांचवीं बार राज्यपाल शासन इसी साल लगा था. 2008 में जम्मू कश्मीर में कांग्रेस और पीडीपी की सरकार थी, लेकिन अमरनाथ मुद्दे पर बात ना बनने के कारण कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया और गुलाम नबी आजाद की सत्ता अल्पमत में आ गई. 7 जुलाई 2008 को विधानसभा में विश्वासमत की वोटिंग से पहले ही गुलाम ने अपने पद के इस्तीफा दे दिया. जुलाई में सरकार गिरने के बाद जनवरी 2009 तक घाटी में राज्यपाल शासन लगा रहा. विधानसभा चुनावों के बाद उमर अब्दुल्ला की सरकार सत्ता में आई.
-23 दिसंबर 2014 को जम्मू कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित किए गए. चुनावों के परिणाम आने के बाद एक बार फिर से कोई भी पार्टी विधानसभा में पूर्ण बहुमत साबित करने में विफल रही. हालांकि उमर अब्दुल्ला प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनें रहे. 7 जनवरी तक उमर के कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में दोबारा राज्यपाल शासन लगाने की मांग की गई. उस समय वोहरा के कार्यकाल में दूसरी बार राज्यपाल शासन लगा.
Source:-ZEENEWS
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-25 जून 2008 को एनएन वोहरा पहली बार जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बनें थे. वोहरा के कार्यकाल में पहली बार और जम्मू कश्मीर में पांचवीं बार राज्यपाल शासन इसी साल लगा था. 2008 में जम्मू कश्मीर में कांग्रेस और पीडीपी की सरकार थी, लेकिन अमरनाथ मुद्दे पर बात ना बनने के कारण कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया और गुलाम नबी आजाद की सत्ता अल्पमत में आ गई. 7 जुलाई 2008 को विधानसभा में विश्वासमत की वोटिंग से पहले ही गुलाम ने अपने पद के इस्तीफा दे दिया. जुलाई में सरकार गिरने के बाद जनवरी 2009 तक घाटी में राज्यपाल शासन लगा रहा. विधानसभा चुनावों के बाद उमर अब्दुल्ला की सरकार सत्ता में आई.
-23 दिसंबर 2014 को जम्मू कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित किए गए. चुनावों के परिणाम आने के बाद एक बार फिर से कोई भी पार्टी विधानसभा में पूर्ण बहुमत साबित करने में विफल रही. हालांकि उमर अब्दुल्ला प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनें रहे. 7 जनवरी तक उमर के कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में दोबारा राज्यपाल शासन लगाने की मांग की गई. उस समय वोहरा के कार्यकाल में दूसरी बार राज्यपाल शासन लगा.
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