भारत के अनुभवी निशानेबाज जीतू राय ने 21वें कॉमनवेल्थ खेलों के पांचवें दिन भारत को 8वां गोल्ड मेडल दिलाया. बेलमोंट शूटिग सेंटर में आयोजित पुरुषों की 10 मीयर एयर पिस्टल निशानेबाजी स्पर्धा के फाइनल में जीतू ने सोना जीता, वहीं भारत के एक अन्य निशानेबाज ओम मिथरवाल ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया.
जीतू राय का सफर
भारत के जीतू राय का सफर भी मुश्किलों से भरा रहा है. उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे. 2006 में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. जीतू के पिता नेपाल के संखुवासभा जिले के रहने वाले थे और भारतीय सेना के गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में नौकरी करते थे. भारत में नौकरी मिलने के बाद जीतू के पिता परिवार को नेपाल में छोड़कर भारत आ गए थे. लेकिन पिता की मौत के बाद 19 साल की उम्र में जीतू ने भी भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट ज्वाइन की और दो साल बाद जीतू ने निशानेबाजी को चुना. 2011 में जीतू को उनके खराब प्रदर्शन की वजह से नायब सूबेदार ने दो बार महू में आर्मी की मार्क्समैन यूनिट से वापस भेज दिया गया था.
देश के नंबर एक निशानेबाज हैं जीतू
इसके बाद जीतू ने अपने खेल पर ध्यान दिया और धीर-धीरे सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए. 2014 में ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में गोल्ड, वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर, दो वर्ल्ड कप सिल्वर, इंचियोन एशियाड में स्वर्ण और कांस्य पदक अपने नाम किया. 2015 वर्ल्ड कप में कांस्य और 2017 ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में दो ब्रॉन्ज मेडल पर निशाना साधा. हालांकि 2016 रियो ओलिंपिक में 10 मी एयर पिस्टल में 8वें और 50वें मी एयर पिस्टल में 12वें स्थान पर रहे थे. इससे निराश जीतू ने फैसला किया कि वे सिर्फ 10मी एयर पिस्टल का अपना ध्यान लगाएंगे. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में जीतू ने सोने पर निशाना लगाया.
Source:-Aajtak
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जीतू राय का सफर
भारत के जीतू राय का सफर भी मुश्किलों से भरा रहा है. उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे. 2006 में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. जीतू के पिता नेपाल के संखुवासभा जिले के रहने वाले थे और भारतीय सेना के गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में नौकरी करते थे. भारत में नौकरी मिलने के बाद जीतू के पिता परिवार को नेपाल में छोड़कर भारत आ गए थे. लेकिन पिता की मौत के बाद 19 साल की उम्र में जीतू ने भी भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट ज्वाइन की और दो साल बाद जीतू ने निशानेबाजी को चुना. 2011 में जीतू को उनके खराब प्रदर्शन की वजह से नायब सूबेदार ने दो बार महू में आर्मी की मार्क्समैन यूनिट से वापस भेज दिया गया था.
देश के नंबर एक निशानेबाज हैं जीतू
इसके बाद जीतू ने अपने खेल पर ध्यान दिया और धीर-धीरे सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए. 2014 में ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में गोल्ड, वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर, दो वर्ल्ड कप सिल्वर, इंचियोन एशियाड में स्वर्ण और कांस्य पदक अपने नाम किया. 2015 वर्ल्ड कप में कांस्य और 2017 ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में दो ब्रॉन्ज मेडल पर निशाना साधा. हालांकि 2016 रियो ओलिंपिक में 10 मी एयर पिस्टल में 8वें और 50वें मी एयर पिस्टल में 12वें स्थान पर रहे थे. इससे निराश जीतू ने फैसला किया कि वे सिर्फ 10मी एयर पिस्टल का अपना ध्यान लगाएंगे. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में जीतू ने सोने पर निशाना लगाया.
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